कुछ भावनाएँ शब्दों की मोहताज नहीं होतीं,
कुछ रिश्ते खामोशी में भी बोलते हैं।
जो कह न सके हम कभी,
वही आँखों में आज भी पलते हैं।
वक्त गुजरता रहा,
मगर कुछ स्मृतियाँ वहीं ठहर गईं,
जैसे किसी पुराने पन्ने पर
स्याही की आखिरी बूंद ठहर गई हो।

कुछ भावनाएँ शब्दों की मोहताज नहीं होतीं,
कुछ रिश्ते खामोशी में भी बोलते हैं।
जो कह न सके हम कभी,
वही आँखों में आज भी पलते हैं।
वक्त गुजरता रहा,
मगर कुछ स्मृतियाँ वहीं ठहर गईं,
जैसे किसी पुराने पन्ने पर
स्याही की आखिरी बूंद ठहर गई हो।
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