बड़ी देर तक रोया
तुम्हारी याद में
कहते थे न तुम
कि मैं हँसता
अच्छा लगता हूँ ।
न पोंछे आँसू मेरे
न खामोश कराया तुमने
यह किस तरह से
बन्धन निभाये तुमने ।
आवाज दिया करते थे तुम
हर बार मुझे
घर से कहीं बाहर जाने से पहले,
आज दबे पाँव
बिना आहट के
क्यों चले गए तुम ।
NN

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