“मौन”
ही तो है सत्यता की भाषा,
वास्तविकता के प्रमाण,
प्रेम की मधुर भाषा,
मौनी साधे दो
साधक
एक चातक
दूसरा चकोर,
एक भीगना चाहता है
बारिशों में
और दूसरा
नहाना चाहता है
श्वेत चाँदनी में ।
किन्तु मौन रहकर
धैर्य धर कर
प्रतीक्षा करते हैं दोनों
अपने-अपने प्रेमियों की ।

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