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Poetry
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Original Printed Book
Quick Details
- FormatPaperback
- ISBN9788168720275
- LanguageHindi
- Pages98
- Book Size5x8 inch
- Binding—
- Publisher—
Poetry
Ye Duniya Ek Bhojan Hai
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वैज्ञानिकों ने इस दुनिया को विज्ञान कहा, दार्शनिकों ने इस दुनिया को दर्शन कहा, वेद-पुराणों ने इसे ईश्वर की सृष्टि कहा, इस संसार में घूमने वाले पर्यटकों ने इसे स्वर्ग कहा तथा आस्तिकों ने चमत्कार कहा परन्तु कवि की दृष्टि में ये दुनिया एक भोजन है। वे कहते हैं कि मैं, तुम एवं हम सब प्रत्यक्ष तथा अप्र...
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About This Book
वैज्ञानिकों ने इस दुनिया को विज्ञान कहा, दार्शनिकों ने इस दुनिया को दर्शन कहा, वेद-पुराणों ने इसे ईश्वर की सृष्टि कहा, इस संसार में घूमने वाले पर्यटकों ने इसे स्वर्ग कहा तथा आस्तिकों ने चमत्कार कहा परन्तु कवि की दृष्टि में ये दुनिया एक भोजन है। वे कहते हैं कि मैं, तुम एवं हम सब प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी का भोजन हैं।
यह पुस्तक कोई मनोरंजन की सामग्री नहीं है और न ही यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो कल्पनाओं में डूबकर किसी सातवें आसमान का सुख प्राप्त करना चाहते हैं अपितु यह पुस्तक आस्तिक और ईश्वर की सच्ची लड़ाई, शिकायतों तथा रोष का कोष है। ईश्वर से कुछ ऐसे तीखे सवालों की बौछार है ये पुस्तक जिन सवालों के जवाब इंसान सदियों से खोज रहा है लेकिन ईश्वर सदैव मौन रहा है।
इस पुस्तक को आध्यात्मिक पुस्तक समझकर कतई मत खरीदना क्योंकि यह पुस्तक ईश्वर और इंसान की लड़ाई की पुस्तक है।
कवि ने इस दस्तावेज़ में एक नौसिखिए की रफ डायरी के उन रफ पन्नों को भी शामिल किया है जब वो यौवन के पहले वसन्त को समझने का प्रयास करता है अर्थात कुछ अलग सी अनुभूति का अनुभव करता है जिसे शब्दों में समेटना कठिन है। इस पुस्तक के एक पक्ष में समाज को दर्पण दिखाने का प्रयास किया है अर्थात स्वयं को ही दर्पण दिखाया है; हम स्वयं भी तो समाज का ही हिस्सा हैं।
यह पुस्तक कोई मनोरंजन की सामग्री नहीं है और न ही यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो कल्पनाओं में डूबकर किसी सातवें आसमान का सुख प्राप्त करना चाहते हैं अपितु यह पुस्तक आस्तिक और ईश्वर की सच्ची लड़ाई, शिकायतों तथा रोष का कोष है। ईश्वर से कुछ ऐसे तीखे सवालों की बौछार है ये पुस्तक जिन सवालों के जवाब इंसान सदियों से खोज रहा है लेकिन ईश्वर सदैव मौन रहा है।
इस पुस्तक को आध्यात्मिक पुस्तक समझकर कतई मत खरीदना क्योंकि यह पुस्तक ईश्वर और इंसान की लड़ाई की पुस्तक है।
कवि ने इस दस्तावेज़ में एक नौसिखिए की रफ डायरी के उन रफ पन्नों को भी शामिल किया है जब वो यौवन के पहले वसन्त को समझने का प्रयास करता है अर्थात कुछ अलग सी अनुभूति का अनुभव करता है जिसे शब्दों में समेटना कठिन है। इस पुस्तक के एक पक्ष में समाज को दर्पण दिखाने का प्रयास किया है अर्थात स्वयं को ही दर्पण दिखाया है; हम स्वयं भी तो समाज का ही हिस्सा हैं।
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