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Poetry
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Quick Details
- FormatPaperback
- ISBN9788168571020
- LanguageHindi
- Pages192
- Book Size5x8 inch
- Binding—
- Publisher—
Poetry
Shabdpunj / शब्दपुंज
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स्त्री, सदैव भाव के हिंडोले पर झूलती रहती है, चाहे सावन भादो की बरसात हो या बैशाख जेठ की तपिश ! भाव ऋतु संग नहीं झूलती, झूलती है, समय संग, क्षण और पल के सानिध्य में कभी पूर्व के भाव वर्तमान में पैठ लगा जाते हैं तो वर्तमान कभी उड़ कर भविष्य को झूला देता है। यही है स्त्री मन के "शब्दपुंज" । इसके पह...
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About This Book
स्त्री, सदैव भाव के हिंडोले पर झूलती रहती है, चाहे सावन भादो की बरसात हो या बैशाख जेठ की तपिश ! भाव ऋतु संग नहीं झूलती, झूलती है, समय संग, क्षण और पल के सानिध्य में कभी पूर्व के भाव वर्तमान में पैठ लगा जाते हैं तो वर्तमान कभी उड़ कर भविष्य को झूला देता है। यही है स्त्री मन के "शब्दपुंज" । इसके पहले अपने भावों को "अन्तर्मन के स्वर" से आप सभी सुधीजन को सुनाया था । "अन्तर्मन के स्वर " मेरा प्रथम काव्य संग्रह था । इस दूसरी काव्य संग्रह "शब्दपुंज" में आप सभी सुधीजन को भाव के हिंडोले पर झुला रही हूं। प्रयास है भावों को अंकित करने का, जो भाव स्वयं से, परिवार से, समाज से अथवा राष्ट्र से जुड़े हैं। निर्णय आपको लेना है कि भाव के "शब्दपुंज" उगाने में मेरा स्त्री मन कितना सक्षम रहा।
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